शनिवार, 6 जून 2026

बिहार में सुशासन का सच

राजीव नगर थाना क्षेत्र से लापता युवती के अपहरण के लिए आरोपित लोगों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही थी पुलिस? 

केसीआईबी, पटना। 
पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र से अपहृत युवती रचना सिंह को फ़ोन कर-कर के विवाह करने के लिए जबरन उठा लेने की धमकी देने वाले जिस युवक को तेजस्वी यादव का ड्राइवर कहा जा रहा था उसके बारे में पता चल गया है। दरअसल वह राजद नेता तेजस्वी यादव के समर्थन से दानापुर की जिला पार्षद बनी महिला नेत्री रेणु राय का ड्राइवर है। विदित हो कि १५ जनवरी २०२१ को सब्जी खरीदने के लिए अपने घर से निकली रचना सिंह नामक युवती जब वापस नहीं लौटी तो उसके परिजन राजीव नगर थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए गये थे। अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के दौरान गुमशुदा युवती के परिजनों ने अज्ञात लोगों के द्वारा विभिन्न मोबाइल फोन नम्बर्स से फोन कर के उनकी बेटी को घर से उठा लेने की धमकी देने की बात भी कही थी। जिसके आधार पर दिनांक १६.०१.२०२१ को राजीव नगर थाना काण्ड संख्या १९/२१ दर्ज कर के पुलिस ने अनुसन्धान कार्य आरम्भ कर दिया था। अनुसन्धान के क्रम में यह बात सामने आया कि उस घटना को अंजाम देने वाला मुख्य अभियुक्त एक राजद नेता का ड्राइवर संजीत कुमार उर्फ़ संजीत कुमार यादव है। जिसके बारे में राजीव नगर थाना की पुलिस ने ही पीड़ित आवेदिका अनुराधा किशोर को यह बताया था कि "उनकी बेटी का अपहरण नहीं हुआ है बल्कि वह स्वयं तेजस्वी यादव की पार्टी से जुड़े एक दबंग नेता के यहाँ ड्राइवर का काम करने वाले युवक के साथ भाग गयी है। यह अपहरण का मामला नहीं बल्कि प्रेम-प्रसंग का मामला है।" 
लेकिन इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी करने वाली अपनी बेटी के किसी ड्राइवर के साथ भागने की घटना से इंकार करते हुए अपहृत युवती की माँ और पंचायत समिति की भूतपूर्व सदस्य अनुराधा किशोर! पुलिस को बार-बार अपहरण का ही मामला बताते हुए अपनी बेटी को मुक्त करवाने के लिए गिड़गिराती रही हैं। इसके लिए जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह और वरीष्ठ पुलिस अधिकारियों से राजीव नगर थाना क्षेत्र के थानाध्यक्ष निशान्त कुमार को फ़ोन करवाने पर भी न तो इस काण्ड के मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी हुई है और न ही अपहृत युवती रचना सिंह को मुक्त या बरामद करवाया गया है। 

इस मामले में करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह के बयान के अनुसार कुछ करणी सैनिक राजीव नगर के थानाध्यक्ष के साथ माला राय के ड्राइवर संजीत कुमार के घर पर गये थे। जहाँ संजीत कुमार के घर के बाहर इंतजार कर रहे करणी सैनिकों को पुलिस ने बताया था कि "रचना इन्हीं लोगों के साथ रहना चाहती है। इसे परिजनों से ही अपने जान का खतरा है। इसके कारण वह अपने घर वापस नहीं जाना चाहती है।" जबकि इसी थानाध्यक्ष ने जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह को मोबाइल फोन पर कहा था कि "संजीत कुमार और रचना सिंह ने एफिडेविट भेज कर यह दावा किया है कि वे दोनों स्वेच्छा से शादी कर लिये हैं। इस पर उन लोगों का लोकेशन पूछने पर इंस्पेक्टर ने ही बताया था कि कुछ दिन पहले तक उनका लोकेशन महाराष्ट्र के बड़ोदरा में था। लेकिन अब उनका मोबाइल फ़ोन लगातार स्वीच ऑफ होने के कारण लोकेशन ट्रेस नहीं हो रहा है।"

राजीव नगर थाना प्रभारी के द्वारा जदयू प्रवक्ता संजय सिंह और करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह को दिये गए बयानों में अन्तर से ही स्पष्ट था कि थानाध्यक्ष सच को छुपा रहा है। शिकायतकर्ता अनुराधा किशोर के साथ इस घटना की तफ्तीश में लगे विभिन्न सूत्रों के आधार पर यही प्रतीत हो रहा है कि थाना काण्ड संख्या १९/२०२१ का मामला प्रेम प्रसंग का नहीं बल्कि अपहरण का है। हालांकि जब तक अपने घर से लापता हुई युवती कोर्ट में आकर अपना बयान नहीं देती है इस सम्बन्ध में कहना मुश्किल है। इस मामले का संदिग्ध अभियुक्त संजीत कुमार यादव के साथ जिस अपहृत युवती रचना सिंह को विवाह कर के महाराष्ट्र में छुपे होने की जानकारी राजीव नगर थाना के थानाध्यक्ष दे रहे हैं वे लोग दानापुर में ही हैं, इसका पुख्ता सबूत हम लोगों को मिल चुका था। लेकिन उन आरोपितों के घर के सामने राजीव नगर थाना के पुलिस की सुरक्षा के कारण हमारे हाथ बन्धे हुए हैं। यदि उसे पुलिस सुरक्षा नहीं मिली होती तो उन लोगों को उठा कर कोर्ट में 2-4 दिन पहले ही कोर्ट में हाजिर कर चुके होते। लेकिन अपहरणकर्ताओं को ही मिली हुई विशेष सुरक्षा को देख कर हमारी टीम आशंकित थी कि देर होने पर इस मामले में यह भी हो सकता है कि रचना सिंह को डरा-धमका कर यह गिरोह किसी साजिश को अंजाम देने की फिराक में हो। इसके कारण मुझे यकीन था कि इस मामले में निष्पक्ष होकर जाँच करने पर उपरोक्त राजद नेता के ड्राइवर के साथ उसका साथ देने वाले अन्य लोगों की संलिप्तता का राज भी सामने आ जाएगा। 

इस घटना को अंजाम देने से पहले रचना सिंह को फ़ोन कर के अपहृत करने की धमकी देने वाला संजीत कुमार यादव नामक युवक के बारे में छान-बीन करने पर पता चला कि वह जिस राजद नेता का गाड़ी चलाता है वह भी आपराधिक पृष्ठभूमि का है और राजीव नगर से दीघा तक दबंगई करने के लिए मशहूर है। अपनी दबंगई के बल पर ही ये लोग राजीव नगर थाना क्षेत्र में स्थित आवास बोर्ड की जमीन पर घर बना कर रह रहे बाहरी लोगों से अवैध वसूली भी करते रहे हैं। इन लोगों की दबंगई इतनी है कि इलाके में अपना खौफ़ बनाये रखने के लिए राजद समर्थित दानापुर की जिला पार्षद रेणु राय के पति माला राय और उसके दोनों बेटे गुरुदयाल व श्रीदयाल के साथ उनके गिरोह में शामिल अन्य दस-बारह लोगों ने एक मामुली विवाद में विकास राय नामक १९ वर्षीय युवक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। २१ जुलाई २०१९ को घटित इस घटना के आठ-दस दिन पूर्व माला राय की जिस सफारी गाड़ी से विकास राय नामक युवक की बाइक अनियन्त्रित होकर टकरा गई थी उसकी उत्तरी दानापुर की जिला पार्षद रेणु राय के भाई सूरज सरकार, रेणु राय का पति माला राय और उसके बेटे गुरुदयाल व श्रीदयाल, विकास यादव, सुरेंद्र राय व उसका भाई मुकेश राय, हरि लाल, रंजन, भोला राय व बृजमोहन सहित अन्य लोगों ने पीट-पीटकर मारने के बाद गोली मार कर हत्या कर दी थी। उस मामले के प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया था कि नेपाली नगर में रहने वाले सूरज सरकार ने ही गोली मारकर विकास राय की हत्या को अंजाम दिया है। उस घटना के दौरान जिस सफारी गाड़ी में विकास राय की बाइक गलती से टकरा गई थी उस गाड़ी का ड्राइवर संजीत कुमार यादव ही था। यदि यह युवक आपराधिक पृष्ठभूमि का नहीं होता तब उस घटना के बाद उन लोगों की नौकरी छोड़ दिया होता। लेकिन इस युवक की ऐसे मामलों में अवश्य संलिप्तता होगी जिसके कारण यह युवक आज भी इन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की ही गाड़ी चलाता है।
 
स्थानीय लोगों की मानें तो दानापुर की जिला पार्षद रेणु राय और माला राय के दोनों बेटों गुरु दयाल और श्रीदयाल के गिरोह में दर्जनभर से अधिक लोग थे, जो हमेशा साथ चलते थे। राजीव नगर में इनके खिलाफ कोई कुछ नहीं बोलता था, जो चुप्पी तोड़ता था उसे धमकी देकर मुंह बन्द करा देते थे। वर्ष २०१९ में घटित विकास राय की हत्या के कुछ माह पूर्व राजीव नगर के वीर कुंअर सिंह चौक के पास माला राय के दोनों बेटों ने कोचिंग से लौट रही एक छात्रा से छेड़खानी की थी। परिजनों को जब इसकी खबर हुई तो थाने में दोनों का नाम नहीं लिया, बल्कि नाम लेने पर गम्भीर अंजाम भुगतने की धमकी के भय से सिर्फ़ इतना ही कहा था कि 'कुछ लड़के राह चलते छात्राओं से छेड़खानी करते हैं।' पुलिस दोनों आरोपितों को भलीभांति जानती थी, इसके बावजूद जानबूझकर कोई कारवाई नहीं की। कोचिंग के बाहर सादे लिबास में पुलिस जरूर तैनात कर दिया गया था। लेकिन पुलिस ने जिला परिषद् की सदस्य रेणु राय की धौंस के कारण इस मामले को भी रफा-दफा कर दिया था।

पुलिस की उसी लापरवाही के कारण उन लोगों का मनोबल बढ़ता गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि उस घटना के तीन महीने बाद ही एक मामूली झड़प के कारण विकास राय नामक १९ वर्षीय युवक की गोली मारकर हत्या कर दिया था। उस मामले में गिरफ्तार होकर जेल जाने के बाद हो सकता है कि इन लोगों को अपनी शाख घटती हुई नजर आ रही हो। जिसे पुनः बहाल करने के लिए इस थाना क्षेत्र में फिर से दहशत का माहौल उत्पन्न करना चाह रहा हो। उसी साजिश के तहत रचना सिंह के अपहरण की इस घटना को अंजाम दिया गया हो। अतः पुलिस को उपरोक्त सभी सम्भावित बिन्दुओं पर विचार करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का प्रयास करना चाहिए। इस घटना की अवधि और साक्ष्य देखने के लिए 11 फरवरी 2021 को लिखित मेरे Facebook पेज के संलग्न लिंक पर क्लिक करें। क्रमशः ... 
              (यह संस्मरण मेरी डायरी से उद्धृत है) 

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